शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2074

2074 की 47 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

3 मुहूर्त
18 जनवरीगुरुवारउत्तर फाल्गुनीषष्ठी
19 जनवरीशुक्रवारहस्तसप्तमी
25 जनवरीगुरुवारमूलत्रयोदशी

फ़रवरी

10 मुहूर्त
1 फ़रवरीगुरुवारउत्तर भाद्रपदापंचमी
2 फ़रवरीशुक्रवाररेवतीषष्ठी
7 फ़रवरीबुधवारमृगशिराएकादशी
12 फ़रवरीसोमवारमघाप्रतिपदा
14 फ़रवरीबुधवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
17 फ़रवरीशनिवारस्वातीषष्ठी
19 फ़रवरीसोमवारअनुराधाअष्टमी
21 फ़रवरीबुधवारमूलएकादशी
23 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर आषाढ़ात्रयोदशी
28 फ़रवरीबुधवारउत्तर भाद्रपदातृतीया

मार्च

3 मुहूर्त
1 मार्चगुरुवाररेवतीतृतीया
14 मार्चबुधवारउत्तर फाल्गुनीप्रतिपदा
15 मार्चगुरुवारहस्तद्वितीया

अप्रैल

3 मुहूर्त
16 अप्रैलसोमवारमूलपंचमी
18 अप्रैलबुधवारउत्तर आषाढ़ाअष्टमी
29 अप्रैलरविवाररोहिणीतृतीया

मई

7 मुहूर्त
6 मईरविवारमघादशमी
12 मईशनिवारअनुराधाद्वितीया
16 मईबुधवारउत्तर आषाढ़ाषष्ठी
21 मईसोमवारउत्तर भाद्रपदाएकादशी
26 मईशनिवाररोहिणीप्रतिपदा
27 मईरविवाररोहिणीप्रतिपदा
28 मईसोमवारमृगशिराद्वितीया

जून

4 मुहूर्त
2 जूनशनिवारमघासप्तमी
7 जूनगुरुवारस्वातीत्रयोदशी
10 जूनरविवारमूलप्रतिपदा
29 जूनशुक्रवारमघापंचमी

जुलाई

3 मुहूर्त
1 जुलाईरविवारउत्तर फाल्गुनीसप्तमी
2 जुलाईसोमवारहस्तअष्टमी
4 जुलाईबुधवारस्वातीदशमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

9 मुहूर्त
1 नवंबरगुरुवारउत्तर भाद्रपदात्रयोदशी
7 नवंबरबुधवारमृगशिरातृतीया
15 नवंबरगुरुवारउत्तर फाल्गुनीएकादशी
16 नवंबरशुक्रवारहस्तद्वादशी
19 नवंबरसोमवारअनुराधाप्रतिपदा
21 नवंबरबुधवारमूलतृतीया
23 नवंबरशुक्रवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
28 नवंबरबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी
29 नवंबरगुरुवाररेवतीएकादशी

दिसंबर

5 मुहूर्त
3 दिसंबरसोमवाररोहिणीपूर्णिमा
5 दिसंबरबुधवारमृगशिराद्वितीया
10 दिसंबरसोमवारमघाषष्ठी
12 दिसंबरबुधवारउत्तर फाल्गुनीअष्टमी
15 दिसंबरशनिवारस्वातीद्वादशी

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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