शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2073

2073 की 52 शुभ विवाह तिथियाँ — नक्षत्र, तिथि और मास सहित। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास तथा रिक्ता तिथियाँ छोड़ी गई हैं।

जनवरी

7 मुहूर्त
15 जनवरीरविवारउत्तर भाद्रपदासप्तमी
16 जनवरीसोमवाररेवतीअष्टमी
20 जनवरीशुक्रवाररोहिणीएकादशी
21 जनवरीशनिवारमृगशिराद्वादशी
26 जनवरीगुरुवारमघातृतीया
28 जनवरीशनिवारहस्तपंचमी
30 जनवरीसोमवारस्वातीअष्टमी

फ़रवरी

7 मुहूर्त
1 फ़रवरीबुधवारअनुराधादशमी
3 फ़रवरीशुक्रवारमूलद्वादशी
12 फ़रवरीरविवाररेवतीपंचमी
17 फ़रवरीशुक्रवारमृगशिरादशमी
22 फ़रवरीबुधवारमघापूर्णिमा
24 फ़रवरीशुक्रवारउत्तर फाल्गुनीतृतीया
27 फ़रवरीसोमवारस्वातीषष्ठी

मार्च

3 मुहूर्त
5 मार्चरविवारउत्तर आषाढ़ाद्वादशी
10 मार्चशुक्रवारउत्तर भाद्रपदाद्वितीया
11 मार्चशनिवाररेवतीद्वितीया

अप्रैल

4 मुहूर्त
20 अप्रैलगुरुवारउत्तर फाल्गुनीत्रयोदशी
24 अप्रैलसोमवारअनुराधातृतीया
26 अप्रैलबुधवारमूलपंचमी
28 अप्रैलशुक्रवारउत्तर आषाढ़ासप्तमी

मई

10 मुहूर्त
4 मईगुरुवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
5 मईशुक्रवाररेवतीत्रयोदशी
10 मईबुधवारमृगशिरातृतीया
15 मईसोमवारमघाअष्टमी
17 मईबुधवारउत्तर फाल्गुनीदशमी
18 मईगुरुवारहस्तद्वादशी
22 मईसोमवारअनुराधाप्रतिपदा
24 मईबुधवारमूलतृतीया
26 मईशुक्रवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
31 मईबुधवारउत्तर भाद्रपदादशमी

जून

6 मुहूर्त
1 जूनगुरुवाररेवतीएकादशी
7 जूनबुधवारमृगशिराद्वितीया
12 जूनसोमवारमघासप्तमी
16 जूनशुक्रवारस्वातीएकादशी
22 जूनगुरुवारउत्तर आषाढ़ातृतीया
28 जूनबुधवाररेवतीअष्टमी

जुलाई

2 मुहूर्त
3 जुलाईसोमवाररोहिणीत्रयोदशी
12 जुलाईबुधवारहस्तअष्टमी

अगस्त

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

सितंबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

अक्टूबर

कोई मुहूर्त नहीं

इस मास में विवाह वर्जित है।

नवंबर

7 मुहूर्त
11 नवंबरशनिवारउत्तर भाद्रपदाद्वादशी
12 नवंबररविवाररेवतीत्रयोदशी
16 नवंबरगुरुवाररोहिणीद्वितीया
17 नवंबरशुक्रवारमृगशिरातृतीया
23 नवंबरगुरुवारमघाअष्टमी
25 नवंबरशनिवारहस्तएकादशी
27 नवंबरसोमवारस्वातीत्रयोदशी

दिसंबर

6 मुहूर्त
1 दिसंबरशुक्रवारमूलतृतीया
3 दिसंबररविवारउत्तर आषाढ़ापंचमी
8 दिसंबरशुक्रवारउत्तर भाद्रपदादशमी
9 दिसंबरशनिवाररेवतीदशमी
14 दिसंबरगुरुवाररोहिणीपूर्णिमा
15 दिसंबरशुक्रवारमृगशिराप्रतिपदा

ये तिथियाँ कैसे निकाली गईं

  • सूर्योदय के समय चंद्रमा 11 विवाह-नक्षत्रों में से किसी एक में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तर आषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा, रेवती।
  • तिथि रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या न हो।
  • वार मंगलवार न हो।
  • दिन चातुर्मास (देवशयनी → देवउठनी एकादशी) में न पड़े।
  • सूर्य धनु या मीन राशि में न हो (खरमास), और मास अधिक मास न हो।

प्रत्येक तिथि काशी के सूर्योदय पर गणना की गई है। दिन के भीतर लग्न-शुद्धि, गुण मिलान और वर-वधू की कुंडली देखकर ही अंतिम मुहूर्त तय होता है — इसके लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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